WELCOME TO PM SHRI KENDRIYA VIDYALAYA 33 FAD DAPPAR DIGITAL LIBRARY (CHANDIGARH REGION)

Wednesday, January 28, 2026

Story created by Poorvi of class 8 B using AI

 कमरा नंबर 33

हमारे स्कूल में सब कुछ बिल्कुल सामान्य था—शोर से भरी क्लासें, घंटी की आवाज़, भागते बच्चे और डाँटती टीचर्स। लेकिन इस सबके बीच एक चीज़ थी, जो हमेशा अलग और रहस्यमयी रही—कमरा नंबर 33।


वो कमरा स्कूल के पुराने विंग के आख़िरी छोर पर था। उसकी दीवारें ज़्यादा गहरी लगती थीं और दरवाज़े पर हमेशा मोटा सा ताला जड़ा रहता था। न कोई उसमें जाता था, न ही कोई उसके बारे में सवाल करता। बस इतना कहा जाता था—“उधर मत जाना।”


पीटी-2 के एग्ज़ाम नज़दीक थे। कक्षा आठ का आरव मैथ्स में बहुत कमज़ोर था। चाहे जितनी कोशिश कर ले, नंबर हमेशा कम ही आते थे। एक दिन उसकी मैथ्स टीचर ने सख़्त लहजे में कहा,

“अगर पास होना है तो शाम की एक्स्ट्रा क्लासेस लो।”


अगले दिन से आरव स्कूल रुकने लगा। शाम को स्कूल बिल्कुल अलग लगता था—ख़ामोश, सूना और थोड़ा डरावना। तीसरे दिन, एक टीचर उससे मिलने आईं। सादा सूट, शांत चेहरा और आँखों में अजीब सी चमक।

“मैं अनन्या मैम हूँ,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा।


अनन्या मैम ने उसे ऐसा पढ़ाया जैसा किसी ने कभी नहीं पढ़ाया था। सवाल आसान लगने लगे, डर खत्म हो गया। क्लास हमेशा… कमरा नंबर 33 के सामने वाले कमरे में होती थी।

अजीब बात ये थी कि उस बंद कमरे के पास खड़े होते ही हवा ठंडी हो जाती थी।


रिज़ल्ट आया। आरव मैथ्स में टॉप कर गया।


खुशी-खुशी उसने अपनी क्लास टीचर से कहा,

“मैम, अनन्या मैम की वजह से मैं टॉप कर पाया।”


टीचर का चेहरा पीला पड़ गया।

“अनन्या? इस नाम की तो हमारे स्कूल में कोई टीचर ही नहीं है।”


अगले दिन आरव अपनी दोस्त सिया को साथ ले गया। शाम की क्लास में सिया ने भी अनन्या मैम को देखा, उन्हें पढ़ाते सुना। लेकिन जैसे ही घंटी बजी, वो अचानक… गायब हो गईं।


डरे हुए दोनों बच्चे कॉरिडोर में बैठे थे। उन्होंने वहाँ सफ़ाई करने वाले अंकल से पूछा। अंकल ने गहरी साँस ली और धीमी आवाज़ में बोले,

“बच्चो… अनन्या मैम दो साल पहले इसी स्कूल में पढ़ाती थीं। बच्चों से बहुत प्यार करती थीं। एक शाम एक्स्ट्रा क्लास के बाद… इसी विंग में उनकी मौत हो गई थी।”


उसी पल पीछे से कमरा नंबर 33 का ताला अपने आप गिर पड़ा।


अंदर से किसी के कदमों की आवाज़ आई… और एक जानी-पहचानी आवाज़ फुसफुसाई—

“मेहनती बच्चों को मैं कभी अकेला नहीं छोड़ती…”


कॉरिडोर में लाइट्स बुझ गईं।

और कमरा नंबर 33… फिर से बंद हो गया।

No comments:

Post a Comment