सुबह उठे तो सपना टूटा,
अलार्म बोला — “फिर से झूठा!”
कंबल ने कस के पकड़ लिया,
बोला — “आज तो मैंने जीत लिया”।
चाय आई, शक्कर कम,
मुँह बना के बोला मन।
काम ने कॉल किया फोन,
मैंने बोला — “नेटवर्क gone”।
आईना बोला — “हाल खराब”,
मैंने कहा — “भाई, मत दे जवाब”।
दिन निकला हँसी में पूरा,
काम-काज बैठा रहा कोने में अधूरा
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